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सहीह मुस्लिम

नंबर 6380

नंबर 6380किताब 44, नंबर 210अरबी नंबरिंग 2383
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ أَبِي النَّضْرِ، عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يَقُولُ، مَا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ لِحَىٍّ يَمْشِي أَنَّهُ فِي الْجَنَّةِ إِلاَّ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلاَمٍ ‏.‏
Amir b. Sa'd reported that he heard his father (Sa'd b. Abi Waqqas) say:never heard Allah's Messenger (ﷺ) say unto one living and moving about that he was in Paradise except to 'Abdullah b. Salim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।