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सहीह मुस्लिम

नंबर 6379

नंबर 6379किताब 44, नंबर 209अरबी नंबरिंग 2482.02
حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا عَارِمُ بْنُ الْفَضْلِ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ أَسَرَّ إِلَىَّ نَبِيُّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سِرًّا فَمَا أَخْبَرْتُ بِهِ أَحَدًا بَعْدُ ‏.‏ وَلَقَدْ سَأَلَتْنِي عَنْهُ أُمُّ سُلَيْمٍ فَمَا أَخْبَرْتُهَا بِهِ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Apostle (ﷺ) told me something secretly. I informed none about that and Umm Sulaim asked me about it, but I did not tell her even

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।