सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6279

नंबर 6279किताब 44, नंबर 109अरबी नंबरिंग 2435.03
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَأَبُو كُرَيْبٍ جَمِيعًا عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ أَبِي أُسَامَةَ إِلَى قِصَّةِ الشَّاةِ وَلَمْ يَذْكُرِ الزِّيَادَةَ بَعْدَهَا ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Abu Usama up to the slaughtering of a sheep, but he. did not make mention of the subsequent words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।