حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ عُثْمَانَ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا غِرْتُ عَلَى نِسَاءِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِلاَّ عَلَى خَدِيجَةَ وَإِنِّي لَمْ أُدْرِكْهَا . قَالَتْ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا ذَبَحَ الشَّاةَ فَيَقُولُ " أَرْسِلُوا بِهَا إِلَى أَصْدِقَاءِ خَدِيجَةَ " . قَالَتْ فَأَغْضَبْتُهُ يَوْمًا فَقُلْتُ خَدِيجَةَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " إِنِّي قَدْ رُزِقْتُ حُبَّهَا " .
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मुझे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में से केवेल ख़दीजा पर ग़ैरत आती थी। हालाँकि मेरे विवाह से पहले ही उनका निधन हो चुका था। वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इस में से ख़दीजा की सहेलियों को भेजो।" वह कहती हैं कि मैंने एक दिन आप को नाराज करदिया, और मैंने कहा: खदीजा! तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मेरे अंदर उसका प्रेम रचा-बसा है।"
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।