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सहीह मुस्लिम

नंबर 6270

नंबर 6270किताब 44, नंबर 100अरबी नंबरिंग 2429
حَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ، حَدَّثَنَا مَهْدِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ، أَبِي يَعْقُوبَ عَنِ الْحَسَنِ بْنِ سَعْدٍ، مَوْلَى الْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ، قَالَ أَرْدَفَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ذَاتَ يَوْمٍ خَلْفَهُ فَأَسَرَّ إِلَىَّ ��َدِيثًا لاَ أُحَدِّثُ بِهِ أَحَدًا مِنَ النَّاسِ ‏.‏
Abdullah b. Ja'far reported that one day Allah's Messenger (ﷺ) mounted me behind him and narrated to me something in secret which I would narrate to none amongst people

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।