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सहीह मुस्लिम

नंबर 6269

नंबर 6269किताब 44, नंबर 99अरबी नंबरिंग 2428.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ عَاصِمٍ، حَدَّثَنِي مُوَرِّقٌ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَدِمَ مِنْ سَفَرٍ تُلُقِّيَ بِنَا - قَالَ - فَتُلُقِّيَ بِي وَبِالْحَسَنِ أَوْ بِالْحُسَيْنِ - قَالَ - فَحَمَلَ أَحَدَنَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَالآخَرَ خَلْفَهُ حَتَّى دَخَلْنَا الْمَدِينَةَ ‏.‏
Abdullah b. Ja'a'far reported that when Allah's Messenger (ﷺ) came back from a journey he met us. Once he met me, Hasan or Husain, and he mounted one of us before him and the other one behind him until we entered Medina

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।