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सहीह मुस्लिम

नंबर 6252

नंबर 6252किताब 44, नंबर 82अरबी नंबरिंग 2419.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنْ خَالِدٍ، ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، أَخْبَرَنَا خَالِدٌ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، قَالَ قَالَ أَنَسٌ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَمِينًا وَإِنَّ أَمِينَنَا أَيَّتُهَا الأُمَّةُ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِ ‏"‏ ‏.‏
Anas reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:For every Umma there is a man of trust and the man of trust of this Umma is Abu 'Ubaida b. Jarrah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।