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सहीह मुस्लिम

नंबर 6243

नंबर 6243किताब 44, नंबर 73अरबी नंबरिंग 2415.01
حَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرِ، بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ سَمِعْتُهُ يَقُولُ نَدَبَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم النَّاسَ يَوْمَ الْخَنْدَقِ فَانْتَدَبَ الزُّبَيْرُ ثُمَّ نَدَبَهُمْ فَانْتَدَبَ الزُّبَيْرُ ثُمَّ نَدَبَهُمْ فَانْتَدَبَ الزُّبَيْرُ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لِكُلِّ نَبِيٍّ حَوَارِيٌّ وَحَوَارِيَّ الزُّبَيْرُ ‏"‏ ‏.‏
Jabir b. Abdullah reported:I heard Allah's Messenger (ﷺ) exhorting people on the Day of the Battle of the Ditch to fight. Zubair said: I am ready (to participate). He then again exhorted and he again said: I am ready to participate. Thereupon Allah's Messenger (ﷺ) said: Behold. for every Prophet there is a helper and my helper is Zubair

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।