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सहीह मुस्लिम

नंबर 6242

नंबर 6242किताब 44, नंबर 72अरबी नंबरिंग 2414
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ الْمُقَدَّمِيُّ، وَحَامِدُ بْنُ عُمَرَ الْبَكْرَاوِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالُوا حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ، - وَهُوَ ابْنُ سُلَيْمَانَ - قَالَ سَمِعْتُ أَبِي، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ، قَالَ لَمْ يَبْقَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي بَعْضِ تِلْكَ الأَيَّامِ الَّتِي قَاتَلَ فِيهِنَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم غَيْرُ طَلْحَةَ وَسَعْدٍ ‏.‏ عَنْ حَدِيثِهِمَا ‏.‏
Abu 'Uthman reported on one of the days when Allah's Messenger (ﷺ) was fighting and none remained with him save Talha and Sa'd

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of the Merits of the Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।