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सहीह मुस्लिम

नंबर 6157

नंबर 6157किताब 43, नंबर 215अरबी नंबरिंग 2375.01
حَدَّثَنَا هَدَّابُ بْنُ خَالِدٍ، وَشَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ ثَابِتٍ، الْبُنَانِيِّ وَسُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَتَيْتُ - وَفِي رِوَايَةِ هَدَّابٍ مَرَرْتُ - عَلَى مُوسَى لَيْلَةَ أُسْرِيَ بِي عِنْدَ الْكَثِيبِ الأَحْمَرِ وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي فِي قَبْرِهِ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. malik reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:I came. And in the narration transmitted on the authority of Haddib (the words are): I happened to pass by Moses on the occasion of the Night journey near the red mound (and found him) saying his prayer in his grave

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।