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सहीह मुस्लिम

नंबर 6092

नंबर 6092किताब 43, नंबर 150अरबी नंबरिंग 2349.01
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ اللَّيْثِ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ جَدِّي، قَالَ حَدَّثَنِي عُقَيْلُ، بْنُ خَالِدٍ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم تُوُفِّيَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ سَنَةً ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ بِمِثْلِ ذَلِكَ ‏.‏
A'isha reported that Allah's Messenger (ﷺ) died when he had attained the age of sixty-three. And a hadith like this had been transmitted on the authority of Sa'id b. Musayyib

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।