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सहीह मुस्लिम

नंबर 6080

नंबर 6080किताब 43, नंबर 138अरबी नंबरिंग 2342
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ، يَحْيَى أَخْبَرَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم هَذِهِ مِنْهُ بَيْضَاءَ وَوَضَعَ زُهَيْرٌ بَعْضَ أَصَابِعِهِ عَلَى عَنْفَقَتِهِ قِيلَ لَهُ مِثْلُ مَنْ أَنْتَ يَوْمَئِذٍ قَالَ أَبْرِي النَّبْلَ وَأَرِيشُهَا ‏.‏
Abu Juhaifa reported:I saw Allah's Messenger (ﷺ) having some whiteness (in hair) at this place, and Zuhair placed one of his fingers at his chin. Juhaifa was asked how old he had been at that time. He said: I made arrows and put feathers to them (i. e. I had passed my childhood)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।