सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6030

नंबर 6030किताब 43, नंबर 88अरबी नंबरिंग 2319.01
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، كِلاَهُمَا عَنْ جَرِيرٍ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَعَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ قَالاَ أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا حَفْصٌ، - يَعْنِي ابْنَ غِيَاثٍ - كُلُّهُمْ عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ، وَأَبِي، ظِبْيَانَ عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ لاَ يَرْحَمِ النَّاسَ لاَ يَرْحَمْهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏
जरीर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो लोगों पर दया नहीं करता, उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह भी दया नहीं करता।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।