सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 6020

नंबर 6020किताब 43, नंबर 78अरबी नंबरिंग 2312.01
وَحَدَّثَنَا عَاصِمُ بْنُ النَّضْرِ التَّيْمِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ - حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ، عَنْ مُوسَى بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَا سُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الإِسْلاَمِ شَيْئًا إِلاَّ أَعْطَاهُ - قَالَ - فَجَاءَهُ رَجُلٌ فَأَعْطَاهُ غَنَمًا بَيْنَ جَبَلَيْنِ فَرَجَعَ إِلَى قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ أَسْلِمُوا فَإِنَّ مُحَمَّدًا يُعْطِي عَطَاءً لاَ يَخْشَى الْفَاقَةَ ‏.‏
Musa b. Anas reported on the authority of his father:It never happened that Allah's Messenger (ﷺ) was asked anything for the sake of Islam and he did not give that. There came to him a person and he gave him a large flock (of sheep and goats) and he went back to his people and said: My people, embrace Islam, for Muhammad gives so much charity as if he has no fear of want

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।