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सहीह मुस्लिम

नंबर 6019

नंबर 6019किताब 43, नंबर 77अरबी नंबरिंग 2311.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا الأَشْجَعِيُّ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، - يَعْنِي ابْنَ مَهْدِيٍّ - كِلاَهُمَا عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ، اللَّهِ يَقُولُ مِثْلَهُ سَوَاءً ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Jabir b. 'Abdullah through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।