सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 5988

नंबर 5988किताब 43, नंबर 49अरबी नंबरिंग 2299.05
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ أَمَامَكُمْ حَوْضًا كَمَا بَيْنَ جَرْبَا وَأَذْرُحَ فِيهِ أَبَارِيقُ كَنُجُومِ السَّمَاءِ مَنْ وَرَدَهُ فَشَرِبَ مِنْهُ لَمْ يَظْمَأْ بَعْدَهَا أَبَدًا ‏"‏ ‏.‏
Abdullah reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There would be before you a Cistern (as extensive) as there is the distance between Jarba' and Adhruh and there would be jugs like stars in the sky; he who would come to that and drink from it would never feel thirsty after that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।