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सहीह मुस्लिम

नंबर 5931

नंबर 5931किताब 42, नंबर 35अरबी नंबरिंग 2269.04
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ، - وَهُوَ ابْنُ كَثِيرٍ - عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ مِمَّا يَقُولُ لأَصْحَابِهِ ‏ "‏ مَنْ رَأَى مِنْكُمْ رُؤْيَا فَلْيَقُصَّهَا أَعْبُرْهَا لَهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَجَاءَ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ رَأَيْتُ ظُلَّةً ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ ‏.‏
Ibn `Abbas reported that Allah's Messenger (ﷺ) used to say to his Companions:He who amongst you sees a vision should narrate it and I would interpret it for him, and a person came and said: Allah's Messenger, I saw a canopy. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 42 · The Book of Dreams

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।