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सहीह मुस्लिम

नंबर 5930

नंबर 5930किताब 42, नंबर 34अरबी नंबरिंग 2269.03
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ، اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَوْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ عَبْدُ الرَّزَّاقِ كَانَ مَعْمَرٌ أَحْيَانًا يَقُولُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ وَأَحْيَانًا يَقُولُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَجُلاً أَتَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ إِنِّي أَرَى اللَّيْلَةَ ظُلَّةً ‏.‏ بِمَعْنَى حَدِيثِهِمْ ‏.‏
It is reported either on the authority of Ibn 'Abbas or on that of Abu Huraira that a person came to Allah's Messenger (ﷺ) and said:Verily I saw during the night a canopy; the rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 42 · The Book of Dreams

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।