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सहीह मुस्लिम

नंबर 5889

नंबर 5889किताब 41, नंबर 4अरबी नंबरिंग 2256.02
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ مَيْمُونٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، بْنِ عُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَصْدَقُ كَلِمَةٍ قَالَهَا شَاعِرٌ كَلِمَةُ لَبِيدٍ أَلاَ كُلُّ شَىْءٍ مَا خَلاَ اللَّهَ بَاطِلٌ وَكَادَ أُمَيَّةُ بْنُ أَبِي الصَّلْتِ أَنْ يُسْلِمَ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The truest word uttered by a poet is this verse of Labid: "Behold! apart from Allah everything is vain," and Umayya b. Abu Salt was almost a Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of Poetry

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।