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सहीह मुस्लिम

नंबर 5888

नंबर 5888किताब 41, नंबर 3अरबी नंबरिंग 2256.01
حَدَّثَنِي أَبُو جَعْفَرٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ جَمِيعًا عَنْ شَرِيكٍ، قَالَ ابْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا شَرِيكٌ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَشْعَرُ كَلِمَةٍ تَكَلَّمَتْ بِهَا الْعَرَبُ كَلِمَةُ لَبِيدٍ أَلاَ كُلُّ شَىْءٍ مَا خَلاَ اللَّهَ بَاطِلٌ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The truest word spoken by an Arab (pre-Islamic) in poetry is this verse of Labid: "Behold! apart from Allah everything is vain

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of Poetry

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।