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सहीह मुस्लिम

नंबर 5872

नंबर 5872किताब 40, नंबर 11अरबी नंबरिंग 2248.01
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ، أَخْبَرَنَا عِيسَى، - يَعْنِي ابْنَ يُونُسَ - عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سِمَاكِ، بْنِ حَرْبٍ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ وَائِلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تَقُولُوا الْكَرْمُ ‏.‏ وَلَكِنْ قُولُوا الْحَبَلَةُ ‏"‏ ‏.‏ يَعْنِي الْعِنَبَ ‏.‏
Alqama b. Wa'il reported, from his father, Allah's Apostle (ﷺ) having said:Do not say al-karm (for the word vine) but say al-habala (that is grape)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 40 · The Book Concerning the Use of Correct Words

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।