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सहीह मुस्लिम

नंबर 997

नंबर 997किताब 4, नंबर 159अरबी नंबरिंग 443.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلاَنَ، حَدَّثَنِي بُكَيْرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ زَيْنَبَ، امْرَأَةِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَتْ قَالَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا شَهِدَتْ إِحْدَاكُنَّ الْمَسْجِدَ فَلاَ تَمَسَّ طِيبًا ‏"‏ ‏.‏
Zainab, the wife of Abdullah (b. 'Umar), reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said to us: When any one of you comes to the mosque, she should not apply perfume

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।