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सहीह मुस्लिम

नंबर 865

नंबर 865किताब 4, नंबर 28अरबी नंबरिंग 391.02
حَدَّثَنِي أَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ نَصْرِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا كَبَّرَ رَفَعَ يَدَيْهِ حَتَّى يُحَاذِيَ بِهِمَا أُذُنَيْهِ وَإِذَا رَكَعَ رَفَعَ يَدَيْهِ حَتَّى يُحَاذِيَ بِهِمَا أُذُنَيْهِ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ فَقَالَ ‏ "‏ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ‏"‏ ‏.‏ فَعَلَ مِثْلَ ذَلِكَ ‏.‏
मालिक बिन हुवैरिस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, तो अपने दोनों हाथों को कानों के बराबर उठाते और जब रुकू करते, तो अपने दोनों हाथों को कानों तक उठाते। और जब रुकू से सिर उठाते, तो कहते : «سَمع الله لِمَن حَمِده» (अल्लाह ने उसकी सुन ली, जिसने उसकी प्रशंसा की) और उसी प्रकार करते।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।