صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. مطالع الأنوار على صحاح الآثار، تأليف: إبراهيم بن يوسف بن أدهم ابن قرقول، تحقيق: دار الفلاح للبحث العلمي وتحقيق التراث، الناشر: وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية - دولة قطر، الطبعة: الأولى، 1433هـ - 2012 م. المنهاج شرح صحيح مسلم، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، الناشر: دار إحياء التراث العربي، الطبعة: الثانية 1392هـ مجموع الفتاوى ، تأليف: أحمد بن عبد الحليم بن تيمية الحراني، تحقيق: عبد الرحمن بن محمد بن قاسم، الناشر: مجمع الملك فهد لطباعة المصحف الشريف، المدينة النبوية، المملكة العربية السعودية. سبل السلام شرح بلوغ المرام، تأليف : محمد بن إسماعيل بن صلاح الصنعاني، الناشر: دار الحديث الطبعة: بدون طبعة وبدون تاريخ. توضيح الأحكام مِن بلوغ المرام، تأليف: عبد الله بن عبد الرحمن بن صالح البسام، الناشر: مكتبة الأسدي، مكة المكرّمة الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427هـ _ 2006 م.
तशरीह के साथ हदीसें
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, तो अपने दोनों हाथों को कानों के बराबर उठाते और जब रुकू करते, तो अपने दोनों हाथों को कानों तक उठाते।
عن مالك بن الحويرث رضي الله عنه «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان إذا كَبَّر رفع يديه حتى يُحَاذِيَ بهما أُذُنَيْه، وإذا ركَع رفع يَديه حتى يُحَاذِيَ بهما أُذُنَيْه، وإذا رفع رأسه من الركوع» فقال: «سَمع الله لِمَن حَمِده» فعل مِثل ذلك.
मालिक बिन हुवैरिस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, तो अपने दोनों हाथों को कानों के बराबर उठाते और जब रुकू करते, तो अपने दोनों हाथों को कानों तक उठाते। और जब रुकू से सिर उठाते, तो कहते : «سَمع الله لِمَن حَمِده» (अल्लाह ने उसकी सुन ली, जिसने उसकी प्रशंसा की) और उसी प्रकार करते।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com