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सहीह मुस्लिम

नंबर 1066

नंबर 1066किताब 4, नंबर 228अरबी नंबरिंग 475
حَدَّثَنَا مُحْرِزُ بْنُ عَوْنِ بْنِ أَبِي عَوْنٍ، حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ خَلِيفَةَ الأَشْجَعِيُّ أَبُو أَحْمَدَ، عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ سَرِيعٍ، مَوْلَى آلِ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ، قَالَ صَلَّيْتُ خَلْفَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الْفَجْرَ فَسَمِعْتُهُ يَقْرَأُ ‏{‏ فَلاَ أُقْسِمُ بِالْخُنَّسِ * الْجَوَارِ الْكُنَّسِ‏}‏ وَكَانَ لاَ يَحْنِي رَجُلٌ مِنَّا ظَهْرَهُ حَتَّى يَسْتَتِمَّ سَاجِدًا ‏.‏
Amr b. Huraith reported:I said the dawn prayer behind the Apostle of (ﷺ) and heard him reciting: 'Nay. I call to witness the stars, running their courses and setting" (al-Qur'an, lxxxi. 15-16) and Done of us bent his back till he completed prostration

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।