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सहीह मुस्लिम

नंबर 1065

नंबर 1065किताब 4, नंबर 227अरबी नंबरिंग 474.04
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنَا أَبَانٌ، وَغَيْرُهُ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنِ الْبَرَاءِ، قَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لاَ يَحْنُو أَحَدٌ مِنَّا ظَهْرَهُ حَتَّى نَرَاهُ قَدْ سَجَدَ ‏.‏ فَقَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا الْكُوفِيُّونَ أَبَانٌ وَغَيْرُهُ قَالَ حَتَّى نَرَاهُ يَسْجُدُ ‏.‏
Al-Bara' reported:When we were (in prayer) with the Messenger of Allah Allah (ﷺ) none of us benfft his back till we saw he prostrated. Zuhair and others reported:" till we saw him prostrating

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।