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सहीह मुस्लिम

नंबर 1043

नंबर 1043किताब 4, नंबर 205अरबी नंबरिंग 465.04
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، قَالَ أَبُو الرَّبِيعِ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كَانَ مُعَاذٌ يُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْعِشَاءَ ثُمَّ يَأْتِي مَسْجِدَ قَوْمِهِ فَيُصَلِّي بِهِمْ ‏.‏
Jabir b. Abdullah reported:Mu'adh said the night prayer with the Messenger of Allah (ﷺ). He then came to the mosque of his people and led them in prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।