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सहीह मुस्लिम

नंबर 1042

नंबर 1042किताब 4, नंबर 204अरबी नंबरिंग 465.03
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ مُعَاذَ بْنَ جَبَلٍ، كَانَ يُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْعِشَاءَ الآخِرَةَ ثُمَّ يَرْجِعُ إِلَى قَوْمِهِ فَيُصَلِّي بِهِمْ تِلْكَ الصَّلاَةَ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah reported:Mu'adh b. Jabal said the night prayer with the Messenger of Allah (ﷺ) and then returned to his people and then led them in this prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।