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सहीह मुस्लिम

नंबर 5850

नंबर 5850किताब 39, नंबर 201अरबी नंबरिंग 2241.02
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِزَامِيَّ - عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ نَزَلَ نَبِيٌّ مِنَ الأَنْبِيَاءِ تَحْتَ شَجَرَةٍ فَلَدَغَتْهُ نَمْلَةٌ فَأَمَرَ بِجِهَازِهِ فَأُخْرِجَ مِنْ تَحْتِهَا ثُمَّ أَمَرَ بِهَا فَأُحْرِقَتْ فَأَوْحَى اللَّهُ إِلَيْهِ فَهَلاَّ نَمْلَةً وَاحِدَةً ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:An Apostle from amongst the Apostles of Allah encamped under a tree, and an ant bit him, and he commanded his belongings to be removed from underneath the tree. He then commanded and it was burnt, and Allah revealed to bin):" Why one ant (which had bitten you) was not killed?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।