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सहीह मुस्लिम

नंबर 5741

नंबर 5741किताब 39, नंबर 95अरबी नंबरिंग 2204
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مَعْرُوفٍ، وَأَبُو الطَّاهِرِ، وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى، قَالُوا حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، - وَهُوَ ابْنُ الْحَارِثِ - عَنْ عَبْدِ رَبِّهِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ لِكُلِّ دَاءٍ دَوَاءٌ فَإِذَا أُصِيبَ دَوَاءُ الدَّاءِ بَرَأَ بِإِذْنِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏
Jabir reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There is a remedy for every malady, and when the remedy is applied to the disease it is cured with the permission of Allah, the Exalted and Glorious

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।