सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 5696

नंबर 5696किताब 39, नंबर 50अरबी नंबरिंग 2184.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَهَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ مَنْصُورٍ، ح وَحَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، - وَاللَّفْظُ لِزُهَيْرٍ - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا - جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا كُنْتُمْ ثَلاَثَةً فَلاَ يَتَنَاجَى اثْنَانِ دُونَ الآخَرِ حَتَّى تَخْتَلِطُوا بِالنَّاسِ مِنْ أَجْلِ أَنْ يُحْزِنَهُ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:If you are three, two amongst you should not converse secretly between yourselves to the exclusion of the other (third one), unti some other people join him (and dispel his loneliness), for it may hurt his feelings

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।