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सहीह मुस्लिम

नंबर 5654

नंबर 5654किताब 39, नंबर 9अरबी नंबरिंग 2164.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَيَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ - وَاللَّفْظُ لِيَحْيَى بْنِ يَحْيَى - قَالَ يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرُونَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - وَهُوَ ابْنُ جَعْفَرٍ - عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ الْيَهُودَ إِذَا سَلَّمُوا عَلَيْكُمْ يَقُولُ أَحَدُهُمُ السَّامُ عَلَيْكُمْ فَقُلْ عَلَيْكَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:When the Jews offer you salutations, some of them say as-Sam-u-'Alaikum (death be upon you). You should say (in response to it): Let it be upon you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।