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सहीह मुस्लिम

नंबर 5653

नंबर 5653किताब 39, नंबर 8अरबी नंबरिंग 2163.02
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ - قَالاَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ - وَاللَّفْظُ لَهُمَا - قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسٍ، أَنَّعليه وسلم قَالُوا لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِنَّ أَهْلَ الْكِتَابِ يُسَلِّمُونَ عَلَيْنَا فَكَيْفَ نَرُدُّ عَلَيْهِمْ قَالَ ‏ "‏ قُولُوا وَعَلَيْكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Anas reported that the Companions of Allah's Apostle (ﷺ) said to him:The People. of the Book offer us salutations (by saying as-Salamu- 'Alaikum). How should we reciprocate them? Thereupon he said: Say: Wa 'Alaikum (and upon you too)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।