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सहीह मुस्लिम

नंबर 5478

नंबर 5478किताब 37, नंबर 93अरबी नंबरिंग 2092.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَخَلَفُ بْنُ هِشَامٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ الْعَتَكِيُّ، كُلُّهُمْ عَنْ حَمَّادٍ، - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، - عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّوسلم اتَّخَذَ خَاتَمًا مِنْ فِضَّةٍ وَنَقَشَ فِيهِ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ ‏.‏ وَقَالَ لِلنَّاسِ ‏ "‏ إِنِّي اتَّخَذْتُ خَاتَمًا مِنْ فِضَّةٍ وَنَقَشْتُ فِيهِ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ ‏.‏ فَلاَ يَنْقُشْ أَحَدٌ عَلَى نَقْشِهِ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Apostle (ﷺ) had made for him a silver ring. and got engraved on it (Muhammad, Messenger of Allah) and said to the people I have got made a ring of silver and engraved in it (these words) (Muhammad, Messenger of Allah). So none should engrave these (words) like this engravement

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · The Book of Clothes and Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।