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सहीह मुस्लिम

नंबर 5106

नंबर 5106किताब 35, नंबर 43अरबी नंबरिंग 1972.03
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ عَدِيٍّ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَبِي أُنَيْسَةَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنَّا لاَ نُمْسِكُ لُحُومَ الأَضَاحِيِّ فَوْقَ ثَلاَثٍ فَأَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ نَتَزَوَّدَ مِنْهَا وَنَأْكُلَ مِنْهَا ‏.‏ يَعْنِي فَوْقَ ثَلاَثٍ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah reported:We did not eat the flesh of sacrificed animals beyond three (days), but then Allah's Messenger (ﷺ) commanded us to make it a provision for journey and cat it (beyond three days)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।