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सहीह मुस्लिम

नंबर 5105

नंबर 5105किताब 35, नंबर 42अरबी नंबरिंग 1972.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، ح وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، كِلاَهُمَا عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنَا عَطَاءٌ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ، عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُ كُنَّا لاَ نَأْكُلُ مِنْ لُحُومِ بُدْنِنَا فَوْقَ ثَلاَثِ مِنًى فَأَرْخَصَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ كُلُوا وَتَزَوَّدُوا ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ لِعَطَاءٍ قَالَ جَابِرٌ حَتَّى جِئْنَا الْمَدِينَةَ قَالَ نَعَمْ ‏.‏
Jabir b. Abdullah reported:We did not eat the flesh of our sacrificial animals beyond three days in Mina. Then Allah's Messenger (ﷺ) permitted us saying: Eat and make it a provision (for journey). I asked 'Ata' whether Jabir had also said: Till we came to Medina. He said: Yes

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।