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सहीह मुस्लिम

नंबर 5086

नंबर 5086किताब 35, नंबर 23अरबी नंबरिंग 1965.03
وَحَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ حَسَّانَ - أَخْبَرَنَا مُعَاوِيَةُ، - وَهُوَ ابْنُ سَلاَّمٍ - حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، أَخْبَرَنِي بَعْجَةُ بْنُ عَبْدِ، اللَّهِ أَنَّ عُقْبَةَ بْنَ عَامِرٍ الْجُهَنِيَّ، أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَسَمَ ضَحَايَا بَيْنَ أَصْحَابِهِ ‏.‏ بِمِثْلِ مَعْنَاهُ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of 'Uqba b. 'Amir al-Juhan with a slight change of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।