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सहीह मुस्लिम

नंबर 5084

नंबर 5084किताब 35, नंबर 21अरबी नंबरिंग 1965.01
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ أَبِي الْخَيْرِ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَعْطَاهُ غَنَمًا يَقْسِمُهَا عَلَى أَصْحَابِهِ ضَحَايَا فَبَقِيَ عَتُودٌ فَذَكَرَهُ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ ضَحِّ بِهِ أَنْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ قُتَيْبَةُ عَلَى صَحَابَتِهِ ‏.‏
Uqba b. 'Amir reported that Allah's Messenger (ﷺ) gave the gifts of goats to be distributed amongst his Companions. They sacrificed them, but a lamb of one year of age was left. (Someone) made a mention of that to the Messenger of Allah (ﷺ), whereupon he said:You sacrifice it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।