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सहीह मुस्लिम

नंबर 5080

नंबर 5080किताब 35, नंबर 17अरबी नंबरिंग 1962.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، وَهِشَامٌ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلَّى ثُمَّ خَطَبَ فَأَمَرَ مَنْ كَانَ ذَبَحَ قَبْلَ الصَّلاَةِ أَنْ يُعِيدَ ذِبْحًا ثُمَّ ذَكَرَ بِمِثْلِ حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Messenger (ﷺ) offered the 'Id prayer and then delivered the sermon giving the command:He who slaughtered the animal before prayer should slaughter (another animal as a sacrifice). The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।