सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 5025

नंबर 5025किताब 34, नंबर 54अरबी नंबरिंग 1942.01
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي وَحَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، وَوَكِيعٌ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ فَاطِمَةَ، عَنْ أَسْمَاءَ، قَالَتْ نَحَرْنَا فَرَسًا عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَكَلْنَاهُ ‏.‏
Asma' reported:We slaughtered a horse and ate it during the lifetime of Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।