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सहीह मुस्लिम

नंबर 4988

नंबर 4988किताब 34, नंबर 17अरबी नंबरिंग 1932.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ، عَنْ أَبِي، ثَعْلَبَةَ قَالَ نَهَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنْ أَكْلِ كُلِّ ذِي نَابٍ مِنَ السَّبُعِ ‏.‏ زَادَ إِسْحَاقُ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ فِي حَدِيثِهِمَا قَالَ الزُّهْرِيُّ وَلَمْ نَسْمَعْ بِهَذَا حَتَّى قَدِمْنَا الشَّامَ ‏.‏
Abu Tha'laba reported that Allah's Apostle (may peace be upon prohibited the eating of every fanged beast of prey. Zuhri added:We did not bear of it until we came to Syria)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।