सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 4896

नंबर 4896किताब 33, नंबर 192अरबी नंबरिंग 1891.02
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَوْنٍ الْهِلاَلِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ الْفَزَارِيُّ، إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ يَجْتَمِعَانِ فِي النَّارِ اجْتِمَاعًا يَضُرُّ أَحَدُهُمَا الآخَرَ ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ مَنْ هُمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏"‏ مُؤْمِنٌ قَتَلَ كَافِرًا ثُمَّ سَدَّدَ ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Abu Huraira that the Messenger of Allah (ﷺ) said:No two such persons shall be together in Hell as if one of them is such that his presence hurts the other. It was asked: Messenger of Allah, who are they? He said: A believer who killed a disbeliever and (then) kept to the right path

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।