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सहीह मुस्लिम

नंबर 4822

नंबर 4822किताब 33, नंबर 118अरबी नंबरिंग 1860.01
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا حَاتِمٌ، - يَعْنِي ابْنَ إِسْمَاعِيلَ - عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي، عُبَيْدٍ مَوْلَى سَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ قَالَ قُلْتُ لِسَلَمَةَ عَلَى أَىِّ شَىْءٍ بَايَعْتُمْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الْحُدَيْبِيَةِ قَالَ عَلَى الْمَوْتِ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Yazid b. Abu Ubaid (the freed slave of Salama b. al-Akwa') who said:1 asked Salama as to what effect he had sworn fealty to the Messenger of Allah (ﷺ) on the Day of Hudaibiya. He said: To the effect that we will die fighting

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।