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सहीह मुस्लिम

नंबर 4821

नंबर 4821किताब 33, नंबर 117अरबी नंबरिंग 1859.03
وَحَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا شَبَابَةُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ الشَّجَرَةَ ثُمَّ أَتَيْتُهَا بَعْدُ فَلَمْ أَعْرِفْهَا
The tradition has been narrated on the authority of Sa'id b. Musayyib who learnt it from his father. The latter said:I had seen the tree. When I came to the spot afterwards, I could not recognise it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book on Government

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।