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सहीह मुस्लिम

नंबर 4690

नंबर 4690किताब 32, नंबर 172अरबी नंबरिंग 1812.07
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ حَفْصَةَ، بِنْتِ سِيرِينَ عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ الأَنْصَارِيَّةِ، قَالَتْ غَزَوْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَبْعَ غَزَوَاتٍ أَخْلُفُهُمْ فِي رِحَالِهِمْ فَأَصْنَعُ لَهُمُ الطَّعَامَ وَأُدَاوِي الْجَرْحَى وَأَقُومُ عَلَى الْمَرْضَى
It has been narrated on the authority of Umm 'Atiyya, the Ansarite, who said:I took part with the Messenger of Allah (ﷺ) in seven battles. I would stay behind in the camp of men, cook their food, treat the wounded and nurse the sick

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।