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सहीह मुस्लिम

नंबर 4689

नंबर 4689किताब 32, नंबर 171अरबी नंबरिंग 1812.06
وَحَدَّثَنِي أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ الأَعْمَشُ، عَنِ الْمُخْتَارِ بْنِ صَيْفِيٍّ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ هُرْمُزَ، قَالَ كَتَبَ نَجْدَةُ إِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ ‏.‏ فَذَكَرَ بَعْضَ الْحَدِيثِ وَلَمْ يُتِمَّ الْقِصَّةَ كَإِتْمَامِ مَنْ ذَكَرْنَا حَدِيثَهُمْ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Yazid b. Hurmuz. but not complete (as we find in the above mentioned ahadith)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।