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सहीह मुस्लिम

नंबर 4594

नंबर 4594किताब 32, नंबर 75अरबी नंबरिंग 1767.01
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ مَخْلَدٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ أَخْبَرَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لأُخْرِجَنَّ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى مِنْ جَزِيرَةِ الْعَرَبِ حَتَّى لاَ أَدَعَ إِلاَّ مُسْلِمًا ‏"‏ ‏.‏
It has been narrated by 'Umar b. al-Khattib that he heard the Messenger of Allah (ﷺ) say:I will expel the Jews and Christians from the Arabian Peninsula and will not leave any but Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।