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सहीह मुस्लिम

नंबर 4566

नंबर 4566किताब 32, नंबर 47अरबी नंबरिंग 1751.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ، كَثِيرِ بْنِ أَفْلَحَ عَنْ أَبِي مُحَمَّدٍ الأَنْصَارِيِّ، وَكَانَ، جَلِيسًا لأَبِي قَتَادَةَ قَالَ قَالَ أَبُو قَتَادَةَ ‏.‏ وَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ ‏.‏
Abu Muammad al-Ansari, who was the close companion of Abu Qatada. narrated the hadith (which follows)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।