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सहीह मुस्लिम

नंबर 4565

नंबर 4565किताब 32, नंबर 46अरबी नंबरिंग 1750.03
وَحَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ شُعَيْبِ بْنِ اللَّيْثِ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ جَدِّي، قَالَ حَدَّثَنِي عُقَيْلُ، بْنُ خَالِدٍ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَدْ كَانَ يُنَفِّلُ بَعْضَ مَنْ يَبْعَثُ مِنَ السَّرَايَا لأَنْفُسِهِمْ خَاصَّةً سِوَى قَسْمِ عَامَّةِ الْجَيْشِ وَالْخُمْسُ فِي ذَلِكَ وَاجِبٌ كُلِّهِ ‏.‏
It has been narrated on the authority of Abdullah b. 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) used to give (from the spoils of war) to small troops seat on expeditions something more than the due share of each fighter in a large force. And Khums (one-fifth of the total spoils) was to be reserved (for Allah and His Apostle) in all cases

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।