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सहीह मुस्लिम

नंबर 4563

नंबर 4563किताब 32, नंबर 44अरबी नंबरिंग 1750.01
وَحَدَّثَنَا سُرَيْجُ بْنُ يُونُسَ، وَعَمْرٌو النَّاقِدُ، - وَاللَّفْظُ لِسُرَيْجٍ - قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ، اللَّهِ بْنُ رَجَاءٍ عَنْ يُونُسَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ نَفَّلَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَفَلاً سِوَى نَصِيبِنَا مِنَ الْخُمْسِ فَأَصَابَنِي شَارِفٌ وَالشَّارِفُ الْمُسِنُّ الْكَبِيرُ ‏
A hadith has been narrated by Salim who learnt it from his father and said:The Messenger of Allah (ﷺ) gave us an extra (camel) besides our share of Khums; (and in this extra share) I got a Sharif (and a Sharif is a big old camel)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · The Book of Jihad and Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।